अच्छे दिन लाने का वादा कर सत्ता में आई मोदी सरकार के लिए महंगाई बड़ी मुसीबत बनती दिख रही है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक थोक महंगाई दर मई माह में पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। अप्रैल में 5.2 फीसद पर रही थोक महंगाई दर ने मई में 6.01 का स्तर छू लिया है।
मई महीने के थोक महंगाई के आंकड़े खुदरा महंगाई की तुलना में निराशाजनक हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले जारी आंकड़ों के मुताबिक मई में खुदरा महंगाई तीन महीने के निम्नतम स्तर पर पहुंच गई थी। इससे उम्मीद जगी थी कि महंगाई का ताप और कम होगा, फलत: जल्द ही ब्याज दरों में कटौती का रास्ता साफ होगा। लेकिन खुदरा महंगाई में कमी से जगी उम्मीद को थोक महंगाई में वृद्धि ने धराशायी कर दिया है।
अधिक चिंता की बात यह है कि हाल के दिनों में खासकर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में यकायक वृद्धि होती दिख रही है। खासकर आलू, प्याज और हरी सब्जियों के दाम लगातार चढ़ते जा रहे हैं। प्याज को लेकर आशंका है कि इसकी कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
मुसीबत का सबब यह भी है कि इराक में चल रहे गृहयुद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें बीते नौ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। कच्चे तेल की कीमतों में आए इस उछाल को रपए की कीमत में आई गिरावट की वजह भी माना जा रहा है।
साफ है कि यदि इराक संकट जल्द ही नहीं सुलझा तो आयातित पेट्रो पदार्थो की ऊंची कीमतें महंगाई की समस्या को और बढ़ाएंगी। फिर सरकार के पास या तो डीजल-पेट्रोल पर सब्सिडी बढ़ाने का विकल्प होगा अथवा घरेलू बाजार में इनकी कीमतें बढ़ानी होंगी। दोनों ही सूरतों में महंगाई की चुनौती और अधिक गहराएगी।
बहरहाल, आम लोगों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत खाने-पीने की चीजों की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी है।






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